...धूम-धड़ाक

Posted: Tuesday, March 23, 2010 by Vikrant in Labels:
0

प्रस्तुत रचना मैंने एक street-play ‘जागो जागो जागो’ के लिए लिखी थी l


खोजो खोजो खोजो रे
खोजो खोजो खोजो रे
धूम-धड़ाक जोर लगा
धूम-धड़ाक   शोर मचा

घर में चोरी हो गयी रे
चीज़ काम की खो गयी रे
धूम-धड़ाक जोर लगा
धूम-धड़ाक शोर मचा

मेहनत से नाता टूट गया
हाथ की रेखा सो गयी रे
धूम-धड़ाक…

काली डायन रात में आई
सपने सब वो ढो गयी रे
धूम-धड़ाक…

खोजो-खोजो ढूंढ निकालो
भागादौड़ी हो गयी रे
घर में चोरी हो गयी रे
चीज़ काम की खो गयी रे

धूम-धड़ाक जोर लगा
धूम-धड़ाक शोर मचा

0 comments: